Committee Members Profile





Ashok Gulati is Infosys Chair Professor for Agriculture at the Indian Council for Research on International Economic Relations (ICRIER) since March 2014. He is currently also on the Central Board of Directors of the Reserve Bank of India (RBI), National Bank for Agriculture and Rural Development (NABARD), and National Commodities and Derivates Exchange (NCDEX). He was Chairman of the Commission for Agricultural Costs and Prices (CACP), Government of India (2011-14); Director (Markets, Trade and Institutions, and later in Asia) at the International Food Policy Research Institute (IFPRI) (2001-11); NABARD Chair Professor at Institute of Economic Growth (1998-2000); and Director/Chief Economist, Agriculture and Rural Development at National Council of Applied Economic Research (NCAER) from 1991 till 1997. Dr Gulati has been deeply involved in policy analysis and advice in India. He was the youngest member of the Economic Advisory Council of Prime Minister Atal Bihari Vajpayee; Member of the Economic Advisory Council of the Chief Minister of Andhra Pradesh; Member of the State Planning Board of Karnataka; Member of the Economic Transformation Council of the Chief Minister of Rajasthan. For his contributions to the field, the President of India honored him with "Padma Shri”, a high civilian award in 2015. Gulati has 14 books to his credit on Indian and Asian Agriculture, besides numerous research papers in national and International Journals. He has been a prolific writer in media with his current column "From Plate to Plough" in the Indian Express and Financial Express. He did his M.A. and Ph.D. from Delhi School of Economics.



अशोक गुलाटी मार्च, 2014 से भारतीय अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (आईसीआरआईईआर) में कृषि के इन्फोसिस चेयर प्रोफेसर हैं। वे वर्तमान में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई), राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), और नेशनल कमोडिटीज एण्ड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) के सेंट्रल बोर्ड में शामिल हैं। वह कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी), भारत सरकार (2011-14) के अध्यक्ष; अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) (2001-11) के निदेशक (बाजार, व्यापार एवं संस्थान, और बाद में एशिया में); आर्थिक विकास संस्थान में नाबार्ड चेयर (1998-2000); और 1991 से 1997 तक नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) में कृषि एवं ग्रामीण विकास निदेशक/मुख्य अर्थशास्त्री रहे हैं। डॉ. गुलाटी भारत में नीति विश्लेषण और परामर्श सेवा में घनिष्ठ रूप से शामिल रहे हैं। वह प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आर्थिक सलाहकार परिषद में सबसे कम उम्र के सदस्य; आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य; कर्नाटक के राज्य योजना बोर्ड के सदस्य; राजस्थान के मुख्यमंत्री के आर्थिक परिवर्तन परिषद के सदस्य के रूप में कार्यरत रहे। इस क्षेत्र में उनके योगदान के लिए, भारत के राष्ट्रपति ने 2015 में उन्हें प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार "पद्म श्री" से सम्मानित किया। डॉ. गुलाटी ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में कई शोध पत्रों के अलावा, भारतीय और एशियाई कृषि पर 14 पुस्तकों का लेखन किया है। इंडियन एक्सप्रेस और फाइनेंशियल एक्सप्रेस में अपने वर्तमान कॉलम "फ्रॉम प्लेट टू प्लो" के साथ मीडिया में एक शानदार लेखक रहे हैं। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एम.ए. और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।



Dr Pramod Joshi superannuated as the Senior Advisor to the Director-General and the Director-South Asia, International Food Policy Research Institute, Washington DC. Prior to this he was holding the positions of the Director, ICAR-National Academy of Agricultural Research Management, and the Director of the ICAR-National Centre of Agricultural Economics and Policy Research. After his superannuation, he is serving as the Policy Adviser to the World Bank, the Food and Agriculture Organization, Harvest Plus program of CGIAR and Australian Centre for International Agricultural Research (ACIAR). He is also the President of Agricultural Economics Research Association; Secretary, National Academy of Agricultural Sciences; and Honorary Director, Agro-Economic Research CentreDelhi. He has more than 40 years of research experience in the areas of technology policy, natural resource management, markets, and institutional economics. He has extensively worked towards transforming agriculture and market integration in India, and many south and southeast Asian countries. Dr Joshi has received the following awards: Dr M S Randhawa Memorial Award of the National Academy of Agricultural Sciences (2009–11), Dr RC Agarwal Life Time Achievement Award of the Indian Society of Agricultural Economics (2012-13) for his outstanding contribution in social science and agricultural economics research and management; the Global Leadership Award in Agricultural Policies of the Indian Chamber of Food and Agriculture; and the Life Time Achievement Award of the Pantnagar Alumni Almamater Advancement Association. He is the Fellow of the (1) National Academy of Agricultural Sciences, (2) Indian Society of Agricultural Economics, (3) Indian Society of Agricultural Engineering, and (4) International Society of Noni Research. Dr Joshi was President-elect of Indian Society of Agricultural Economics (2014); Conference President of Indian Society of Agricultural Marketing (2014), Conference President of Agricultural Economics Research Association-India (2015), and Secretary-General of 4th World Congress on Conservation Agriculture (2009). Dr Joshi has also served as the chairman of the SAARC Agricultural Centre’s governing board in Dhaka, Bangladesh (2006–08); chairman of the UN-CAPSA governing board in Bogor (2007); member of the BRICS-Agriculture group; and member of the intergovernmental panel on the World Bank’s International Assessment of Agricultural Science and Technology for Development (2007–08). He served as a member of the International Steering Committee for the Climate Change, Agriculture, and Food Security Challenge Program, led by the CGIAR (2009–11). He was also a member of the core group of the Indian government’s “Right to Food” National Human Rights Commission.



डॉ. प्रमोद जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान, वाशिंगटन डीसी के महानिदेशक और निदेशक-दक्षिण एशिया के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यभार संभाला। इसके पहले वह आईसीएआर- राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी के निदेशक, और आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान केन्द्र के निदेशक रहे। अपने सुपरएनुएशन के बाद, वह विश्व बैंक, खाद्य और कृषि संगठन, सीजीआईएआर के हार्वेस्ट प्लस कार्यक्रम और आस्ट्रेलियाई अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र (एसीआईएआर) के नीति सलाहकार के रूप में सेवारत हैं। वह कृषि अर्थशास्त्र अनुसंधान संघ के अध्यक्ष; राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी के सचिव; और, कृषि-आर्थिक अनुसंधान केंद्र, दिल्ली के मानद निदेशक भी हैं। उन्हें प्रौद्योगिकी नीति, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, बाजार और संस्थागत अर्थशास्त्र के क्षेत्रों में 40 से अधिक वर्षों के अनुसंधान का अनुभव है। उन्होंने बड़े पैमाने पर भारत और दक्षिण तथा दक्षिण पूर्व एशिया के अनेक देशों में कृषि और बाजार एकीकरण के रूपान्तरण की दिशा में काम किया है। डॉ. जोशी को निम्नलिखित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं : डॉ. एम.एस. रंधावा मेमोरियल अवार्ड ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (2009-11), सामाजिक विज्ञान और कृषि अर्थशास्त्र अनुसंधान तथा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स का डॉ. आर.सी. अग्रवाल लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड ऑफ (2012-13); इंडियन चैम्बर ऑफ फूड एण्ड एग्रीकल्चर की कृषि नीतियों में ग्लोबल लीडरशिप पुरस्कार; तथा पंतनगर के एलुमनी अल्मामेटर एडवांसमेंट एसोसिएशन का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड। वह (1) नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, (2) इंडियन एग्रीकल्चरल इकोनॉमिक्स, (3) इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, और (4) इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ नोनी रिसर्च के फेलो हैं। डॉ. जोशी इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स (2014) के प्रेसीडेंट-इलेक्ट; इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (2014) के कांफ्रेंस प्रेसीडेंट, कृषि अर्थशास्त्र अनुसंधान संघ-भारत (2015) के कांफ्रेंस प्रेसीडेंट, और चौथे वर्ल्ड कांग्रेस ऑन कंजर्वेशन एग्रीकल्चर (2009) के महासचिव भी रहे। डॉ. जोशी ने बांग्लादेश के ढाका में सार्क कृषि केंद्र के गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष (2006-07); बोगोर (2007) में यूएन-कैप्सा गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष; ब्रिक्स-कृषि समूह के सदस्य; और विश्व बैंक के अंतर्राष्ट्रीय कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास मूल्यांकन (2007-09) के अंतर सरकारी पैनल के सदस्य के रूप में भी काम किया है । उन्होंने सीजीआईएआर (2009-11) के नेतृत्व में जलवायु परिवर्तन, कृषि और खाद्य सुरक्षा चुनौती कार्यक्रम की अंतर्राष्ट्रीय संचालन समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया। वह भारत सरकार के "खाद्य अधिकार" राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुख्य समूह के सदस्य भी रहे।



Secondary school education at Pravara public school, Pravaranagar, Tal. Rahata, Dist. Ahmednagar, Maharashtra. B.Sc.( Agri) graduation from College of Agriculture, Pune, (MPKV, Rahuri). Became a farmer by choice. Impressed by farmer leader Late Sharad Joshi's speach in 1985. Fulltime Shetkari Sanghatana activist since 1990. Nominated as President of Shetkari Sanghatana on 12th Dec 2016.



प्रवरा पब्लिक स्कूल, प्रवरा नगर, ताल रहाता, जिला अहमदनगर, महाराष्ट्र से माध्यमिक स्कूली शिक्षा। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, पुणे, (एमपीकेवी, राहुरी) से बीएससी (कृषि) की। अपनी पसंद से किसान बने। 1985 में किसान नेता स्वर्गीय शरद जोशी के भाषण से प्रभावित हुए। 1990 से शेतकारी संगठन के पूर्णकालिक कार्यकर्ता हैं। 12 दिसंबर 2016 को शेतकरी संगठन के अध्यक्ष के रूप में नामित किए गए।